क्या नागरिकता कानून मुस्लिम विरोधी है? भाजपा ऐसे ही 15 सवालों के जवाब तैयार कर रही

नई दिल्ली. भाजपा ने नागरिकता संशोधन अधिनियम पर विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए एक रिपोर्ट तैयार की है। यह रिपोर्ट डॉ. मुखर्जी मेमोरियल ट्रस्ट ने बनाया है। कानून के बारे में लोगों में जागरुकता पैदा करने के लिए इसे तैयार किया गया है। विपक्ष द्वारा आरोप लगाया जा रहा था कि यह कानून मुस्लिम विरोधी और संविधान के खिलाफ है। इस रिपोर्ट में इन सभी आरोपों को खारिज कर दिया गया है।

यह रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस बयान का भी समर्थन करती है, जिसमें उन्होंने कहा था कि कुल 566 मुस्लिमों को मोदी सरकार के पांच साल में पहले ही भारत की नागरिकता मिल चुकी है। साथ ही कहा था कि यह कानून मुस्लिम विरोधी नहीं है।

देश के मुस्लिमों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं

यह एक बड़ी अफवाह है कि यह कानून अल्पसंख्यकों, विशेषकर मुसलमानों के खिलाफ है। इस देश के मुस्लिमों को चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। कोई भी विदेशी नागरिक चाहे वह जिस धर्म से संबंध रखता है, वह भारतीय नागरिकता के लिए आवेदन कर सकता है। नागरिकता कानून इन प्रावधानों में हस्तक्षेप नहीं करता।

नागरिकता कानून 2 तरह के वर्गीकरण पर आधारित

भाजपा ने रिपोर्ट में 15 बड़े सवालों के जवाब दिए हैं। उदाहरण के लिएयह आरोप कि यह कानून अनुच्छेद 14 के खिलाफ है। भाजपा ने रिपोर्ट में कहा कि अनुच्छेद 14 समानता के अधिकार का मूल है। इसका मतलब यह नहीं है कि सभी श्रेणियों के लोगों पर सभी सामान्य कानून लागू होंगे। नागरिकता कानून दो प्रकार के वर्गीकरण पर आधारित है। पहला पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान जैसे देशों का वर्गीकरण; और दूसरा लोगों का वर्गीकरण। मतलब हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, यहूदी और ईसाई बनाम अन्य लोग।



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चेन्नई में नागरिकता कानून के विरोध में प्रदर्शन करते छात्र।


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