कोई भूखा न सोए इसलिए चूरू के किसानों ने अन्न बैंक बनाया; झारखंड में भटक रहे इंजीनियर को घर में दी पनाह
जब कोरोनाकाल में चारों तरफ नकारत्मकता माहौल है तो ऐसे भी कई लोग हैं जो सेवाधर्म निभा रहे हैं। कोई जरूरतमंदो के लिए खाने का इंतजाम कर रहा है, तो कोई लॉकडाउन में फंसे लोगों को रहने के लिए छत दे रहा है। ऐसे ही सात शहरों की सात सकारात्मक कहानी, जिन्होंने मानवता की मिसाल पेश की है।
राजस्थान: दो माह में 16 गांवों के किसानों ने दिया 20 लाख रु. का गेहूं, ताकि कोई भूखा न सोए, अन्न बैंक की स्थापना
यह राजस्थान के चूरू के सरदारशहर तहसील की कहानी है। यहां पिछले ढाई महीने से अन्नदाताओं को अन्न बैंक चल रहा है। इसमें रुपए का लेन-देन नहीं होता, बल्कि जरूरतमंदों के लिए अन्न लिया जाता है, ताकि कोई भूखा ना सोए। लॉकडाउन के बाद सरदारशहर में प्रशासन औरकिसानों के सहयोग से अन्न बैंक की स्थापना की गई है। बैंक में अब तक 16 गांवों के किसान करीब एक हजार क्विंटल गेहूं का सहयोग कर चुके हैं, जिसकी कीमत करीब 20 लाख रुपए है। इस बैंक में सहयोग करने वाले अधिकतर किसान हैं। बैंक में अब तक जमा हुए गेहूं से आटे के 10 हजार पैकेट तैयार करवाए। 7000 का वितरण किया जा चुका है।
पंजाब:कोरोना से जब सूबा लॉक था, तब 23 हजार लोगदूसरों की जान बचाने को खून देने घर से निकले
यह हौसला बढ़ाती रिपोर्ट पंजाब से हैं। यहां राज्य में कोरोना को लेकर 23 मार्च से कर्फ्यू और लॉकडाउन लग गया था। लोग एहतियात के तौर पर अपने घरों में ठहरे थे। इस दौरान प्रदेशभर से ऐसे हजारों तदाद में लोग थे, जिन्होंने इन गंभीर हालात में दूसरों की जान बचाने के लिए रक्तदान कर ब्लड बैंक में सहयोग किया। 70 दिन चले लॉकडाउन के बीच न तो प्रदेश का कोई ब्लड बैंक ड्राई हुआ और न ही खून की कमी से कोई जान गई। थैलेसीमिया, कैंसर, किडनी, एक्सीडेंट केस जैसे हालात में खून की जरूरत रहती है, जो हर अस्पताल में पूरी हुई। ऐसे में 23,556 पंजाबी रक्तदान के लिए ब्लड बैंकों तक पहुंचे।
हरियाणा:जिन पांच बच्चों का छूट गया था स्कूल, उन्हें गोद लेकर उठाया पढ़ाई का खर्च
यह कहानी हरियाणा के हिसार में दो साल पहले जवाहर नगर में रहने वाले एक मजदूर परिवार के बच्चे की रुपयो के अभाव के चलते पढ़ाई छूटी तो जन मानस सेवा समिति के सचिव व रिटायर्ड प्रधानाचार्य अंबिका प्रसाद ने इन परिवारो की मदद कर सेवा भाव की मिसाल पेश की। अंबिका प्रसाद अब पांच जरूरतमंद बच्चों को खुद के खर्च पर शिक्षा ग्रहण करा रहे हैं। यही नहीं अन्य जरूरतमंद परिवारों के बच्चों को भी मुफ्त किताबें बांटते हैं। हर कोई सामाजिक कार्यकर्ता अंबिका प्रसाद की सराहना कर रहा है।
झारखंड: सदर अस्पताल के रैन बसेरा में एक छत के नीचे सुख-दुख के बने साथी, एक-दूसरे का परिवार जैसा रखते हैं ख्याल
यह घटना झारखंड के चाईबासा सदर अस्पताल की है। यहां रैन बसेरा है। इसमें 60 वर्गफीट का एक कमरा और 5 लोग रहते हैं। सभी अलग-अलग जगहों से आए। एक ही छत के नीचे रहते-रहते ये एक परिवार जैसे हो गए हैं। परिवार के सदस्य की तरह एक-दूसरे का ख्याल रखते है। दु:ख-सुख में साथी होते हैं। इनके बीच किसी तरह का कोई विवाद नहीं होता।
यहां रह रही भरभरिया के मेरोमहोरो गांव की बसंती करुवा ने बताया- वह अपने दो साल के बेटे का इलाज कराने जुलाई-2019 में सदर अस्पताल आई थी। आठ महीने इलाज के बाद जब अस्पताल से छुटटी मिली तो लॉकडाउन शुरू हो गया और गाड़ी चलना बंद हो गया। इधर उसके पति ने दूसरी शादी कर ली। अब वह इसी रैन बसेरा में रह रही है। कमरे में उसके साथ 2 और महिला रहती हैं। इसमें एक बेसहारा बुजुर्ग महिला है। दूसरी महिला किसी से कुछ नहीं बोलती है, बस मुस्कुराती है। एक युवक कमरे के बाहर रहता है। किसी को किसी से कोई दिक्कत नहीं है। कमरे में एक और बुजुर्ग महिला थी, जिसका हाल में निधन हो गया।
मध्यप्रदेश: जिस अस्पताल में जन्म लिया वहीं मरीजों की सेवा में डॉक्टर बेटा
ग्वालियर के एएनएम अस्पताल में मां और डॉक्टर बेटा दोनों कोरोना ड्यूटी कर अपना फर्ज निभा रहे हैं लेकिन मामला दिलचस्प इसलिए हो जाता है कि डॉक्टर बेटा उसी अस्पताल में कोरोना मरीजों की सेवा में जुटा है, जहां उसने 25 साल पहले जन्म लिया था। दोनों शहर के सीपी कॉलोनी में रहने वाले हैं। मां का नाम जा पीटी पॉलसन और उनके बेटे रॉबिन थॉमस है। रॉबिन ने जीआरएमसी से एमबीबीएस किया और यहीं इटर्नशिप पूरी की। दो महीने से रॉबिन जेएएच परिसर में कोल्ड औपीडी में संदिग्ध मरीजो की जांच कर रहे हैं। उधर, मां सुजाघर-घर जाकर कोरोना संदिग्ध मरीजो का सर्वे कर रही हैं।
सुजा कहती हैं कि ये मेरे और बेटे के लिए गर्व का मौका है.. जिस अस्पताल में उसने जन्म लिया वहीं अब मरीजों की सेवा कर रहा है मां सुजा थॉमस ने बताया कि बेटे को उसी अस्पताल में मरीजों की सेवा करते देखकर खुशी होती है जहां उसने जन्म लिया। वह भी ऐसे आपदा काल में, जब लोग महामारी से घबराए हुए हैं। ऐसे में बेटे की सेवा काबिल-ए तारीफ हैं। मैं वार्ड 32 में एएनएम हूं और कोरोना आपदा में घर-घर जाकर सर्वे कर जानकारी ले रही हूं। होम क्वारेंटाइन लोगों की निगरानी का काम भी कर रही हूं।
झारखंड: सड़क पर भटक रहे सॉफ्टवेयर इंजीनियर को समाजसेवी ने अपने घर में दी पनाह
मामला झारखंड के घाटशीला का है, यहां की इस घटना को देखकर लगता है कि इंसानियत अभी जिंदा है मरी नहीं है। इसी सुक्ति को चरितार्थ किया है नुआगांव निवासी कौशल कुमार ने। दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के बाद कौशल कुमार ने सड़क पर भटकते युवा इंजीनियर की खोज की तथा अपने घर में आश्रय दिया। अलग कमरे में रहने की व्यवस्था करते हुए होम क्वारेंटाइन किया है। बता दें कि 5 जून के अंक में दैनिक भास्कर में उक्त युवा इंजीनियर की मकान मालिक ने घर में घुसने देने से किया मना, दोस्त के यहां गया तो पड़ोसियों ने घेर लिया घर, शीर्षक से खबर छपी थी। कुछ लोगों की नासमझी की वजह से हैदराबाद से आए इंजीनियर पृथ्वीराज सिन्हा को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। लोगों के विरोध के कारण उसे रात भर सड़क पर भटकना पड़ा।
झारखंड: गिरडीह मेंकोरोना के डर से जब अपनों ने छोड़ा साथ, तब दूसरे समुदाय के लोगों ने दिया शव को कंधा
गिरडीह के पहाड़ीडीह में वृद्धा की मौत के बाद बेटे शव को श्मशान ले जाने के लिए अपनों का इंतजार करते रहे लेकिन कोई नहीं आया। अपनों को आशंका थी की महिला की मौत कोरोना की वजह से हुई है। इसके बाद दूसरे समुदाय के लोगों ने शव को कंधा दिया। गिरिडीह मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पहाड़ीडीह निवासी 70 वर्षीय लखिया देवी लकवाग्रस्त थी। जिससे वह काफी दिनों से जूझ रही थी। गरीबी के कारण उसका उचित इलाज नहीं हो पा रहा था और रविवार को उसकी मौत हो गई। घर में सिर्फ मृतका का पुत्र जागेश्वर तुरी व प्रकाश तुरी मौजूद थे।
मोहल्ले के लोग शव तक देखने नहीं पहुंचे
महिला की मौत की सूचना मोहल्ले के लोगों को दी गई लेकिन कोरोना के डर से कोई शव देखने तक नहीं आया। दोनों बेटों ने शव को ले जाने की तैयारी कर ली थी लेकिन आसपास के लोगों नहीं पहुंचे। अब कंधा देने के लिए कम से कम चार लोगों की जरूरत थी लेकिन किसी के नहीं आने से दोनों बेटों के समक्ष संकट पैदा हो गई। दोनों बेटों ने आस पड़ोस के लोगों से काफी मिन्नत की लेकिन कोरोना संक्रमण के डर से कोई साथ चलने व शव को कंधा देने को तैयार नहीं हुआ। पड़ोसियों का कहना था कि हो सकता है कि महिला की मौत कोरोना से हुई हो और यदि संपर्क में आए तो वे लोग चपेट में आ सकते हैं।
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source /local/rajasthan/news/the-churu-farmers-set-up-a-grain-bank-so-that-no-one-slept-hungry-hyderabads-software-engineer-wandering-in-jharkhand-sheltered-by-social-worker-127387452.html



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